आपके सवाल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

किसी अपराध को समझाने के लिये ‘ईव टीजिंग’ बहुत ही हल्का शब्द है इसलिए अब इसे यौनिक उत्पीडन कहा जाता है. संछेप में यदि समझें तो यौनिक उत्पीडन वह हरकत कहलाता है जो किसी के लिए अनचाहा, जबरदस्ती का और नापसंद हो.

यौनिक उत्पीडन क्या है?

“यौनिक उत्पीडन वो जबरदस्ती का यौनिक मेलजोल या संपर्क है जो आप नहीं चाहतीं. यह एक ऐसा माहौल है जहाँ औरतों को हमेशा यौनिक और अश्लील बातों का निशाना बनाया जाता है और उन्हें ये बर्दाश्त करना पड़ता है, जैसे कि उसके पास और कोई काम ही नहीं है….” [केथरिन ए. मक्किन्नो, प्रोफ़ेसर ऑफ लॉ, टाइम्स ऑफ इन्डिया, 30-1-2009]

1997 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, किसी भी तरीके का यौनिक व्यवहार जो अनचाहा और बिना स्वागत के हो जैसे शारीरिक संपर्क, यौनिक मांग, यौनिक छींटाकशी, अश्लील चित्र दिखाना, और अन्य कोई मौखिक या शारीरिक हरकत, यौनिक उत्पीडन कहलाता है. यह सूक्ष्म, हल्का, गुप्त, विशिष्ट, दोहराए जाने वाला, लंबा चलने वाला और एक बार होने वाली घटना हो सकता है.

बाद में अपरेल एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल बनाम चोपड़ा केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जोर देते हुए कहा कि ‘कोई भी व्यवहार और बर्ताव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से औरत का शील भंग करता है उसे यौनिक उत्पीडन की परिभाषा में शामिल करना चाहिए.’ इससे यही मतलब निकलता है कि केवल शारीरिक संपर्क ही यौनिक उत्पीडन नहीं है. इसके आलावा, यौनिक उत्पीडन उत्पीडक की मंशा/इच्छा से परिभाषित नहीं होता. आपको तय करना है कि यह यौनिक उत्पीडन है या नहीं. और यदि आपको यह अप्रिय, आपत्तिजनक औए असहज लगता है तो यह यौनिक उत्पीडन ही है.

कौन इसका शिकार हो सकता है?

अध्ययन बताते हैं कि यौनिक उत्पीडन का शिकार कोई भी, कहीं भी, कभी भी और किसी उम्र का भी हो सकता है. हालांकि यह ज्यादातर महिलाओं को होता है, लेकिन एक पुरुष भी इसका शिकार हो सकता है. समलैंगिक संबंधों में, एक पुरुष दूसरे के और एक महिला दूसरी महिला के खिलाफ यौन उत्पीडन कर सकती है.

उत्पीडक कौन है?

यह कोई भी हो सकता है. उत्पीडक आपका पहचान वाला या अजनबी हो सकता है. यौनिक उत्पीडन सेक्स के बारे में नहीं बल्कि सत्ता और ताकत का खेल है. एक मर्द उत्पीडन करता है क्योंकि उसे लगता है कि वह यह कर सकता है.

यह कहाँ हो सकता है?

यह सार्वजनिक जगहों में, घर के निजी छेत्र में, कार्यस्थल और कॉलेज/केम्पस में होता है. हम एक करके इसके बारे में बात करेंगे.

यौनिक उत्पीडन होने पर किसे दोष दिया जाता है?

लोग हो सकता है कि कहें कि आपके कपड़ों, समय या आपके किसी बर्ताव का इससे लेना देना है. इसके लिए आपको नहीं बल्कि यौनिक उत्पीडन करने वाले को दोषी ठहराना चाहिए.

क्या यह इतना गंभीर है कि इसे यौनिक उत्पीडन कहना चाहिए?

हर इंसान का अपना एक सहजता का दायरा होता है जो हम खुद अपने लिए तैयार करते हैं. सहजता का यह क्षेत्र एक चक्र जैसा होता है जो हम दहलीज़ की तरह अपने चारों तरफ बना लेते हैं. यह दहलीज़ तय करती है कि कौन सा व्यवहार स्वीकार है और कौन सा नहीं.

यह अलग अलग लोगों के लिए अलग अलग समय पर फर्क हो सकता है. जैसे कि, एक महिला अपने पुरुष मित्र के गले लगाने से सहज हो सकती है, मगर हो सकता है कि उसे यदि उसका सहकर्मी गले लगाये तो उसे असहजता हो. इस सहजता के दायरे या दहलीज़ का उलंघन केवल स्पर्श से ही नहीं होता. इसका उलंघन गैर शारीरिक हरकत से भी हो सकता है जैसे घूरने, कड़वी बात कहने, निजी सवाल पूछने आदि से. यौनिक उत्पीडन ऐसा ही गंभीर व्यवहार है जिससे किसी व्यक्ति के निजी सहजता दायरे और दहलीज़ का उलंघन/हनन होता है.

यौनिक उत्पीडन फ्लर्ट (इश्कबाज़ी/मजाक) से फर्क कैसे है?

यौन उत्पीडन को महज़ नुकसान ना पहुँचाने वाला या फ्लर्ट कह कर छुटकारा नहीं पाया जा सकता. यौनिक उत्पीडन फ्लर्ट करने के बराबर नहीं है.

फ्लर्ट/मजाक में दो लोग बराबरी से शामिल होते हैं, जहाँ दोनों ही एकदूसरे के प्रति सकारात्मक महसूस करते हैं. यह पूरी तरह से मनचाहा और स्वागत भरा होता है. आप जब फ्लर्ट करते हैं तो सशक्त महसूस करते हैं. यह आपको खुशी देता है.
यौनिक उत्पीडन पूरी तरह से एकतरफा होता है और इसमें यौन भाव निहित होता है, जहाँ एक इंसान दूसरे से डरता है. यह ऐसा व्यवहार होता है जो न ही मनचाहा होता है और ना ही पसंद किया जाता है. यह आपको असहज बनाता है और आपमें शर्म और झिझक का भाव पैदा करता है.

क्या ऑफिस में हुए अफेयर (इश्क) को यौनिक हिंसा का केस कहेंगे?

ऑफिस का सम्बन्ध यौनिक उत्पीडन का केस नहीं है जबतक कि यह सम्बन्ध तय किये गए नियमों और तरीकों के भीतर हो और आपसी समझ वाला हो. लेकिन, यह उस स्थिति में यौनिक उत्पीडन बन जाता है जब महिला तरक्की/बेहतर पद/ट्रान्सफर आदि के लिए किसी दबाव में आकार अपनी सहमति देती है. यह इसलिए यौनिक उत्पीडन का केस बनता है क्योंकि इसमें महिला के केरियर पर बुरा असर पड़ने का डर शामिल होता है.

क्या मेरे कपड़ों का इससे कुछ लेना देना है?

नहीं. यौनिक उत्पीडन का आपके कपड़ों से कुछ लेना देना नहीं है. पश्चिमी/कसा हुआ/छोटे कपड़े यौन उत्पीडन के कारण नहीं हैं. ये सारे मर्दों (और औरतों) के महिला के ऊपर सारा दोष मढ़ने के बहाने हैं. मर्द उन महिलाओं का भी यौन उत्पीडन करते हैं जो ‘ढंग’ के कपड़े पहनती हैं. वे सभी औरतों को चाहे उन्होंने जैसे कपड़े पहने हों या किसी भी उम्र की हों, यौन उत्पीडन करते हैं.

यौन पूर्ण वातावरण क्या है? क्या इसमें यौनिक उत्पीडन शामिल है?

यौन पूर्ण वातावरण ज्यादातर कार्यस्थल होता है जहाँ सेक्स भरे चुटकुले, अश्लील फोटो को इन्टरनेट से डाउनलोड करना, यौन बातों और चित्रों का आपस में लेन देन चलता है. हो सकता है कि यह खासतौर से किसी के तरफ ना हो. इस तरह का माहौल अपने आप में यौन उत्पीडन भरा नहीं होता. लेकिन यदि एक भी सहकर्मी इससे असहज हो या उसे आपत्ति हो तो यह यौन उत्पीडन हो सकता है.

क्या यौन हिंसा यौन उत्पीडन से फर्क है?

यौन हिंसा और यौन उत्पीडन आपस में सम्बंधित होते हैं मगर ये फर्क भी हो सकते हैं.
यौन हिंसा का मतलब है किसी महिला या पुरुष पर शारीरिक बल इस्तेमाल करते हुए, हथियार दिखाकर या ऐसे ही जबरदस्ती यौनिक सम्बन्ध बनाना. बलात्कार, यौन हिंसा का सबसे गंभीर रूप है, जबकि किसी के गुप्तांगों को छूना बलात्कार से ‘कम’ डिग्री वाली हिंसा है.

यौन उत्पीडन व्यापक मायने में जेंडर आधारित हिंसा का रूप है, जो बोलकर या अनबोले किया जाता है जैसे यौन टिपण्णी करना, औरत के शारीर को गन्दी नज़रों से देखना, अनचाहे यौन संपर्क की मांग करना.

यौन हिंसा/ बलात्कार और यौन उत्पीडन दोनों ही अनचाहे हैं और उसमें जबरदस्ती शामिल है. दोनों ही कानूनन अपराध है.

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