कार्यस्थल
“मैं एक एअर होस्टेस हूँ. मुझे ये देखकर नफरत होती है कि मेरे काम के वक्त सैकड़ों नज़रें मेरे जिस्म को घूरती हैं.”सोनाली [डेक्कन हेराल्ड 1-1-2008]
आप घर से बाहर काम के लिए निकलती हैं. आप चाहती हैं कि आपकी पहचान आपकी बुद्धिमान और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में हो. मगर सिर्फ एक हरकत – आपको छूने, गन्दी नज़र से घूरने, सेक्स भरे मजाक करने, अश्लील अर्थ वाले टिपण्णी, यौन संपर्क की मांग से आपको एक सिर्फ ‘शारीर’ बना कर रख देता है. कार्यस्थल पर ये सारी हरकतें यौन उत्पीडन हैं.
यह क्या है
जब आपका मालिक या सहकर्मी आपसे ‘डेट’ मांगता है, आपको छू कर निकल जाता है, बिना वजह बार बार आपको अपने केबिन में बुलाता है, अश्लील चित्र का प्रदर्शन करता है, आपत्तिजनक ईमेल भेजता है, यौनिक संपर्क की मांग करता है तो यह सीधे सीधे यौन उत्पीडन है. यह पूरी तरह से छिपा हुआ भी हो सकता है.
यह यौन उत्पीड़न यह कॉल करने के लिए काफी गंभीर है? आप नाराज हैं और कहा कि कार्रवाई से उल्लंघन लगता है कि अगर ऐसा नहीं है
जैसा कि यौन उत्पीडन की परिभाषा धुंधली हो सकती है, यहाँ हमेशा सवाल रहता है कि :
मैं कैसे समझूँ कि यह सचमुच यौन उत्पीडन है और हल्का फुल्का मजाक नहीं? नीचे दिए गये वाक्यों को देखकर ‘हाँ’ या ‘ना’ में जवाब दें.
- क्या उस व्यहवार का स्वभाव यौनिक था?
- क्या उस व्यवहार ने आपको असहज और भयभीत महसूस करवाया?
- क्या वह गन्दा स्पर्श था?
- क्या कहे गए शब्द में दोहरा मतलब था?
- क्या उस व्यवहार से आपको डर लगा या चिंता हुई?
- आपको महिला होने का एहसास करवाया गया?
- क्या आपको व्यवहार बहुत आपत्तिजनक लगा?
यदि आपने एक से ज्यादा सवालों के जवाब ‘हाँ’ में दिए हैं तो आपको समझना चाहिये कि यह यौन उत्पीडन है:
याद रखें कि:
यौन उत्पीडन फ्लर्ट नहीं है:
- यौन उत्पीडन अफेयर से फर्क है. एक अफेयर यौन उत्पीडन में बदल सकता है जब उसमें महिला के साथ ज़बरदस्ती शामिल हो जाये.
- जब काम की जगह पर दोस्ती की सीमारेखा पार होती है तो यौन उत्पीडन का मामला हो सकता है. यह आप ही हैं जो ऑफिस के संबंधों की दह्लीजें तय करते हैं.
- ऑफिस सम्बन्ध आपसी होते हैं. हालांकि यौन उत्पीडन ज़बरदस्ती का होता है. यह तुरंत यौन उत्पीडन में तब्दील हो जाता है जब किसी आदमी का बर्ताव अनचाहा हो जाता है.
- यहाँ यौन उत्पीडन के कुछ उदाहरण दिए गए हैं जिससे आपको इसे पहचानने में मदद मिलेगी.
- यौन सम्बन्ध की मांग करना
- अश्लील नज़रों से घूरना और शारीर के हिस्सों को देखना
- व्यक्तिगत और निजी सवाल पूछना
- आपके शारीर के हिस्सों, कपड़ों और दिखावे पर टिपण्णी करना
- डार्लिंग, हनी आदि जैसे शब्दों से आपको पुकारना, जो आपको असहज बनाते हैं
- भद्दे और अश्लील चुटकुले कहना या ऐसे चुटकुले जो महिला को हीन बनाये, अश्लील गाने गाना, अश्लील ईमेल भेजना, कार्यस्थल पर आपको अश्लील बातें पढ़कर सुनाना
- आपके व्यक्तिगत स्पेस को लांघना
- आपके शारीर को छूते हुए गुज़र जाना
- अचानक छूना, पीछे से पकड़ना या छाती पर हाथ लगाना, चिकोटी काटना, रगड़ना, बेमतलब आपको गले लगाना.
- ऑफिस के काम बाद बिना वजह बुलाना
- बेमतलब के सन्देश भेजना
- आपके माना कर देने के बावजूद आपसे ‘डेट’ पर जाने के लिए जिद करना
- अश्लील हावभाव बनाना जैसे अपने गुप्तांगों को खुजलाना और आपके सामने अपने शर्ट या बेल्ट खोलना
- इच्छुक, दोहरे अर्थ बयान देने के लिए दूसरों के सामने आपको नीचा दिखाने के लिए
- दूसरों के सामने आपको बेमतलब छूना
- हाथ मिलते समय ज़रूरत से ज्यादा देर तक आपके हाथ को पकड़े रखना
- आपको किसी खास तरह के कपड़े पहनने के लिए कहना
- ऑफिस केबिन में बिना किसी वजह के आपको बार बार बुलाना
- ऑफिस में अकेला पाकर घेर लेना
- आपके सामने पुरुष सहकर्मियों के साथ यौन संबंधी चुटकुले सुनाना
- आपको शराब और सिगरेट पीने का लिए ज़बरदस्ती करना
- अपने साथ बाहर जाने के लिए आपके साथ ज़बरदस्ती करना
- ऑफिस के बाहर आपका पीछा करना
- उसके साथ सोने या अफेयर करने के लिए आपके साथ ज़बरदस्ती करना
- बाहर बिजिनेस दौरे पर आपको यौन सम्बन्ध बनाने के लिए कहना
यौन उत्पीडन के प्रकार
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार यौन उत्पीडन दो प्रकार के होते हैं :
कुइड प्रो को एक प्रकार है जिसके तहत यौन सम्बन्ध बनाने के बदले में नौकरी में अच्छे पद, नौकरी की सुरक्षा, तरक्की, बेहतर वेतन देने की शर्त रखना.
उदाहरण के लिए जैसे आपका बॉस या सीनियर सहकर्मी कहे कि “मैं तुम्हारे लिए यह (……………)कर सकता हूँ मगर इसके बदले में मुझे क्या मिलेगा?”
इस तरह के यौन उत्पीडन के केसों में अक्सर उत्पीडक के पास बॉस होने या मालिक होने की वजह से आपसे ज्यादा अधिकार या सत्ता होती है. इस तरह के यौन उत्पीडन अक्सर सामने खुले तौर पर होते हैं.
शत्रुता पूर्ण काम का माहौलमें वो सभी व्यवहार शामिल है जो भेदभाव पूर्ण है. जैसे महिलाओं के लिए टोइलेट्स या बाथरूम ना होना, चूँकि वे महिला है इसलिए उसके काम में कमी निकालते रहना, उसकी यौनिक पहचान के नाते उसके साथ असमानता करना, उसकी तरक्की ना करना और यौन उत्पीडन के मामलों का मजाक बनाना.
“यदि मुझे कोई समस्या होती तो प्रिन्सीपल पहले मुझे उसे खुश करने को कहता तब मेरी समस्या देखने कि बात करता. वह जब भी मुझे देखता अश्लील हावभाव के साथ देखता. एक स्कूल पिकनिक पर उसने मेरी तरफ देखते हुए कहा कि, ‘ मुझे हर समय घर का बना खाना खाना अच्छा नहीं लगता, कभी कभी मुझे बाहर खाना भी अच्छा लगता है.”
– एक सीनियर स्कूल टीचर [डीएनए, 2/7/2007]
संभावित कदम
‘ एक पुरुष सहकर्मी अक्सर अश्लील कहानियां सुनाता था. मैंने उसे रोकने की कोशिश की मगर वो नहीं माना. मैं अपने बॉस के पास गई कि वो उससे बात करे मगर मेरी ये कोशिश भी बेकार गई.” – कॉल सेंटर की एक महिला कर्मचारी
हजारों महिलाएं चुपचाप कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन सहती रहती हैं, क्योंकि उन्हें नौकरी चली जाने, मजाक बनने, शर्म से बचने और आगे और यौन उत्पीडन हो इसका डर रहता है. जब आपके साथ यौन उत्पीडन हुआ हो या हो रहा हो तो आप क्या कर सकती हैं? आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आप इस उत्पीडन को रोकें.
अनौपचारिक कदम
अनौपचारिक तरीके औपचारिक की तुलना में ना केवल जल्दी और सरल उपाय हैं बल्कि ज्यादातर केसों में मददकारी भी हैं. यहाँ आपका मकसद है कि उत्पीडन को तुरंत रोका जाए. उत्पीडक को अक्सर ये उम्मीद नहीं होती कि आप प्रतिरोध करेंगी. आपका मकसद होना चाहिए कि उसकी हरकत को सामने लाया जाए.
उत्पीडक से कैसे सामना करें
- यह बहुत महत्वपूर्ण है कि जैसे ही यौन उत्पीडन हो उसे रोकने की कोशिश करें या विरोध करें. अगर ज़रूरत हो तो अभ्यास करें, “ मुझे बहुत अपमानजनक लगा जिस तरह से (——) आपने उस दिन (——) इसलिए मैं कहती हूँ इसे तुरंत बंद करो.”
- उसकी हरकतों को ऑफिस में सबके सामने उजागर करें. दूसरे लोगों को उसके बारे में बताएं. क्या पता हो सकता है कि अन्य महिलाएं भी हों जिनके साथ ऐसी घटना हुई हो.
- उत्पीडक को बताएं कि आपको यौन उत्पीडन से भयमुक्त माहौल में काम करने का अधिकार है.
आपके बोलने का लहजा गंभीर और शांतिपूर्वक होना चाहिए - उत्पीडक से सामना करते वक्त आपने हावभाव पर नियंत्रण रखें. मजबूत बनी रहें, सीधे उसकी आँखों से नज़रें मिलाकर बात करें, घबराएँ नहीं. बात करते समय सीधे खड़ी रहें और अपनी आवाज़ को स्थिर रखें. रोयें नहीं, उसके गलत बर्ताव के विषय में ही बात करें.
- चिठ्ठी लिखना उत्पीडक के साथ सामना करने का एक प्रभावकारी तरीका है. खासतौर से जब कहने पर भी यौन उत्पीडन ना रुके. इस चिठ्ठी की एक कॉपी अपने पास रखें और एक मानव संसाधन या जेनरल मैनेजर (यदि आप उन्हें इस मामले में शामिल करने का निर्णय लेती हैं) को दें. घटना को डीटेल में लिखें, घटना का दिन, समय और उससे आपके ऊपर कैसा असर हुआ. चिठ्ठी को रजिस्टर पोस्ट से भेजें और उसकी पर्ची सावधानी से अपने पास रखें.
- भले ही पहले आपने उत्पीडक के यौनिक संपर्क को स्वीकार कर लिया हो (डर या दबाव की स्थिति में), फिर भी आपको पूरा अधिकार है कि किसी भी समय आप उसकी मांग का विरोध कर सकती हैं या रोक सकती हैं. आपको इसका भी पूरा अधिकार है कि आप इसकी शिकायत दर्ज करें.
अर्ध औपचारिक कदम
अर्ध औपचारिक तरीकों का मतलब है कि आप इस मुद्दे को अनौपचारिक रूप से मगर मनेजमेंट या उच्च अधिकारी के पास ले जा रही हैं. उदाहरण के लिए, मनेजमेंट या सुपरवाइजर की तरफ से एक ऑफिसियाल पत्र ही मामले को सुलझा सकता है. कई संस्थानें इसी तरह उत्पीडन के केसों को अंदर ही अंदर सुलझा लेना चाहते हैं ताकि उनके बारे में नकारात्मक सोच का प्रचार ना हो.
- पता करें कि आपके ऑफिस में शिकायत समिति है (जैसा कि विशाखा गाइडलाइंस के अंतर्गत सुझाव दिया गया है) या यौन उत्पीडन के खिलाफ़ आपकी कंपनी में पोलिसी है. इस तरह के मामलों में मानव संसाधन विभाग आपकी मदद कर सकता है.
- यदि आपके टोकने के बाद भी उत्पीडन लगातार हो ही रहा है तो मानव संसाधन से सलाह लें. अक्सर मानव संसाधन या सुपरवाइजर से भेजी गई चिठ्ठी उत्पीडन रोकने में सहायक होती है.
- अपने सहकर्मियों के बीच विशाखा गाइडलाइंस और कंपनी में मौजूदा पोलिसी के बारे में जागरूकता लायें. कंपनी में यदि कोई और महिला भी यौन उत्पीडन से परेशान है तो जोइंट शिकायत दर्ज करें.
- यौन उत्पीडन के खिलाफ़ पोलिसी और सही व्यवहार के नियम को उत्पीडक के पास भेजें.
- मानव संसाधन और सुपरवाइजर से उत्पीडन में मामले में चर्चा करते समय इसे गुप्त बनाये रखने का आपका अधिकार है.
ट्रेड यूनियन या गैर सरकारी संस्थाओं से मदद लेना
यदि आपको लगता है कि आपकी समस्या को आपके मनेजमेंट ने ठीक से नहीं लिया या आपको उनसे किसी तरह का भय है तो आप थर्ड पार्टी जैसे ट्रेड यूनियन या गैर सरकारी संस्थाओं के पास मदद के लिये जा सकती हैं. यदि आप उत्पीडक के खिलाफ़ क़ानूनी कार्यवाई करना चाहती हैं तो गैर सरकारी संस्था (जो खासतौर से महिला मुद्दों पर काम करती हो) खासतौर से उपयोगी है.
औपचारिक शिकायत को तैयार करना
- औपचारिक शिकायत दर्ज करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है उत्पीडन की घटना को डाक्यूमेंट करना. इसका मतलब है आपको घटना के बारे में डीटेल नोट तैयार करना – कोई धमकी दी गई हो, तारीख, किस जगह घटना घटी, आपको कैसा महसूस हुआ, आपने कैसे जवाब दिया, जब आपने पलट कर सामना किया तो उत्पीडक का बर्ताव कैसा था, क्या शब्द इस्तेमाल हुए थे और यदि घटना का कोई गवाह है.
- इस नोट को आप ऑफिस में नहीं बल्कि घर में रखें.
- यदि आपके काम में कोई बदलाव आता है जैसे कि आपको वो प्रोजेक्ट करने के लिए देना जिसे करने का रोल आपका नहीं है.
- यदि यौन उत्पीडन में शारीरिक हिंसा या बलात्कार भी शामिल है तो अपनी मेडिकल जांच करवाएं. इस मेडिकल रिपोर्ट को सावधानी से रखें क्योंकि क़ानूनी कार्यवाई करने के लिए यह बहुत ही ज़रुरी डोक्युमेंट है.
- अपने काम के रिकॉर्ड की कॉपी, कंपनी के काम के बारे में, यौन उत्पीडन के खिलाफ़ पोलिसी, आपके काम का मूल्यांकन, ऑफिसियाल डोक्युमेंट जिसमें आपके काम की तारीफ हो या अन्य कोई भी दस्तावेज जो आपके केस के लिए उपयोगी हो उसे रखें. ये सारे दस्तावेज आप अपने घर में रखें.
- यह महत्वपूर्ण है कि आप ये सारे डोक्युमेन्ट्स किसी ज़िम्मेदार गवाह की जानकारी से इकट्ठा करें. इन डोक्युमेन्ट्स का स्त्रोत क्या है इसकी जानकारी होना बहुत ज़रुरी है.
- यौन उत्पीडन की घटना का कोई गवाह तैयार करें. किसी सहकर्मी को तैयार करें जो अपनी आँखों से घटना को देख सकें या सुन सके. आपके केस को मजबूत बनाने के लिए यह बहुत ही ज़रुरी पक्ष है.
औपचारिक या क़ानूनी कदम
औपचारिक तरीके का मतलब है लिखित में शिकायत. आपके कार्यस्थल के स्वभाव पर निर्भर करता है कि आप कौन सा तरीका अपनाती हैं. उदाहरण के लिये बैंक में काम करने वाली महिला को जो विकल्प है वह घरेलु कामगार से फर्क होगा. आमतौर पर आपके पास चार विकल्प/रास्ते हैं.
1] ऑफिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज करना
प्रत्येक कंपनी का अपना कार्य प्रबंधन और आचार-व्यवहार का नियम तरीका होता है. यौन उत्पीडन का मामला अक्सर कंपनी के अनुशासन और नैतिकता का उलंघन माना जाता है. विशाखा गाइडलाइंस के अनुसार कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन कंपनी के आचार-व्यवहार नियम का हनन है और इसके खिलाफ़ कड़ी कार्यवाई होनी चाहिए.
1.अपनी संस्था में औपचारिक शिकायत दर्ज करने की समय अवधि के बारे में पता कर लें. कुछ संस्थाओं में यह 6 महीने है और अनौपचारिक प्रक्रिया के लिए कोई समय सीमा नहीं है.
2.शिकायत फॉर्म : शिकायत पत्र में निम्नलिखित ब्यौरा होना चाहिए
a.शिकायत करने की तारीख
b.शिकायत करने वाले और उत्पीडक का नाम और पद
c.घटना का डीटेल ब्यौरा, तारीख, समय और घटना का सन्दर्भ
d.यौन उत्पीडन की यदि एक से ज्यादा घटना हो तो शिकायत पत्र में तारीख और समय के अनुसार उसका सिलसिलेवार ब्यौरा लिखें.
e.जो कोई भी घटना का गवाह है उसका नाम लिखें. इन गवाहों को इसमें सहमति होनी चाहिए.
f.यदि उत्पीडक आपसे ऊँचे पद पर है तो शिकायत पत्र में इसका जिक्र करें.
g.यदि आपने उत्पीडक की मांग को पूरा किया हो या उसका विरोध किया हो, इसका जिक्र करें.
h.यदि कोई मौखिक टिका टिप्पड़ी की गई हो तो उसे भी लिख लीजिए.
i.जितना संभव हो शिकायत में घटना का उतना डीटेल दें.
3.यौन उत्पीडन के केस पर ही फोकस करें ना कि काम संबंधी मुद्दों पर.
4.घटना के गंभीर पहलू को बार बार दोहराएँ.
5.औपचारिक शिकायत पत्र, एक कवरिंग पत्र और प्राप्ति की रसीद के साथ सज़ा देने जैसे कदम उठाने वाले अधिकारी को दें.
6.सुनिश्चित करें कि आपको शिकायत फॉर्म की प्राप्ति रसीद मिले. आपके द्वारा औपचारिक रूप से जमा किये गए शिकायत का यह महत्वपूर्ण सबूत है, बाद में मालिक भी इसे मना नहीं कर सकता कि आपने शिकायत पत्र नहीं दिया.
7.एक बार औपचारिक शिकायत पत्र मिल जाने के बाद मालिक उसे या तो लोकल पुलिस स्टेशन (जिस थाने के क्षेत्र के अंदर ऑफिस है) भेजेगा या उत्पीडक के खिलाफ़ कड़े कदम लेगा, उसे सज़ा दिलाएगा.
2] शिकायत समिति के पास केस दर्ज करना
आपके पास शिकायत समिति के पास जाने का भी विकल्प है. विशाखा गाइडलाइंस के मुताबिक इस समिति में कम से कम 50 % महिला सदस्य और एक तिहाई सदस्य गैर सरकारी संस्थानों से होने चाहिए. यह विकल्प केवल संगठित सेक्टर के लिए है असंगठित सेक्टर के केस के लिए कोर्ट जाना पड़ेगा. नीचे दी गई बातों का ध्यान रखें.
- यदि आप यौन उत्पीडन की शिकार हैं तो आप सीधे तौर पर शिकायत समिति को अपनी शिकायत भेज सकती हैं या उन्हें यह शिकायत डिसिप्लिनरी अधिकारी द्वारा भेजा जायेगा.
- इस समिति को यह अधिकार है कि ये आरोपी को अनौपचारिक रूप से पूछताछ के लिए बुला सकते हैं.
- यदि आपको लगता है कि शिकायत समिति का गठन ठीक से नहीं हुआ है तो आपको पूरा अधिकार है कि आप लिखित में अपनी शिकायत को डिसिप्लिनरी अधिकारी के पास दे सकती हैं. जैसे कि अधिकारियों की समिति में कोई सदस्य आरोपी के अंतर्गत काम करने वाला ना हो या फिर थर्ड पार्टी का प्रतिनिधि यौन उत्पीडन के मुद्दे पर समझ ना रखता हो.
- यदि केस पक्षपाती हो तो इसे सुलझाना मुश्किल है, चाहे आपके या आरोपी के पक्ष में, आपको हर स्थिति में घटना की सही जानकारी देनी है. इसीके साथ यदि आप थर्ड पार्टी को व्यक्तिगत रूप से जानती हैं, आपको अपने संपर्क के बारे में नहीं बताना चाहिए, क्योंकि हो सकता है इसे आपके खिलाफ़ इस्तेमाल किया जाए.
- आपको पूरा अधिकार है कि आप पूरी प्रक्रिया को गोपनीय बनाये रखें. यहाँ तक कि स्थिति की मांग की वजह से गवाहों को भी गोपनीयता बनाकर रखनी चाहिए (उदाहरण के लिए, उन्हें आरोपी द्वारा धमकी और उत्पीडन के केस होने की संभावना)
- पूछताछ के समय आप चाहें तो आपकी कोई मित्र या काउंसलर आपके साथ हो सकती है, कुछ मामलों में तो आपके साथ वकील भी हो सकता है. इसके आलावा आपके केस को समिति के सामने पेश करने के लिए आपको प्रस्तुतकर्ता अधकारी की सुविधा भी दी जा सकती है.
- सबसे बड़ी संभावना हो सकती है कि आपके पास कोई गवाह ना हो. इस तरह के केसों में घटना की सही और विस्तृत जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका नीभा सकते हैं.
क्रिमिनल (आपराधिक) केस दर्ज करना
क्रिमिनल केस दर्ज करने का मतलब है आपने केस को दूर तक ले जाने का निर्णय लिया है. इसका मतलब है ज्यादा समय और खर्चा. यह एफ आई आर लिखने की प्रक्रिया से शुरू होता है. जैसा कि यह क्रिमिनल केस है तो अन्य लोगों द्वारा भी पत्र रजिस्टर्ड होगा. उदाहरण के लिए, शत्रुता पूर्वक काम के माहौल में सहकर्मियों का समूह जोइंट रूप से केस दर्ज कर सकता है. इसके साथ ही कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन के केस में मालिक पर क़ानूनी रूप से बाध्यता है कि वह पुलिस में शिकायत दर्ज करे.


