सड़कों पर होने वाला यौन उत्पीडन
भीड़ से निकल कर आपके शारीर को छूता हुआ हाथ, साईकिल सवार द्वारा आपके दुपट्टे को खींचना, ‘लड़कों’ के समूह द्वारा आप पर टिप्पणी करना, बस में आपके कपड़ों को चीरते हुए घूरना, ऑटो ड्राइवर का अपने शीशे को ठीक करने के बहाने आपको देखना या किसी आदमी का आपको जानबूझकर धक्का मारना. यौन उत्पीडन जिसे भारत में ईव-टीजिंग भी कहते हैं, सड़कों पर यह बहुत ही कॉमन और परेशान करने वाला है.
यह क्या है?
संछेप में, यौन उत्पीडन अनचाहा बर्ताव है जिसका कई रूप है जैसे सिटी बजाना आदि. इसके परिभाषा में मुख्य समस्या है कि इसका जुडाव ‘ईव-टीजिंग’ के साथ है.
‘ईव-टीजिंग’ का मतलब है बगैर किसी नुकसान के मज़ा, जिसे औरतें भी चाहती हैं या पसंद करती हैं. ‘ईव’ का मतलब है महिला जो कामुक है चंचल है, जो लोगों का ध्यान आकर्षित करती है और उसका जो परिणाम होता है उसके लिए वह खुद ही ज़िम्मेदार है. ‘ईव-टीजिंग’ हल्केफुल्के मजाक और उन परिस्थितियों को इशारा करता है जो हिंदी फिल्मों और गानों में दिखाया जाता है जहाँ हीरोइनें हीरों के अनचाहे आकर्षण का विरोध सिर्फ इसलिए करती हैं कि बाद में उन्हें उनके प्यार में पड़ना है.
हालांकि, यह उतना हानिकारक नहीं है.महिलाओं के लिए यह सदमे भरा अनुभव होता है. ईव-टीजिंग भ्रामक होता है – यह यौन उत्पीडन की घटना में निहित सत्ता के खेल को छिपा देता है. यह इंडियन पिनल कोड के तहत ना केवल सिर्फ एक अपराध है बल्कि यह आज़ादी से घूमने फिरने और आत्मसम्मान के साथ जीने का संवैधानिक अधिकार का भी उलंघन भी है.
मर्द क्यों उत्पीडन करते हैं? अध्यन बताते हैं कि मर्द इसलिए उत्पीडन करते हैं क्योंकि महिलाएं आसान शिकार होती हैं. क्योंकि उन्हें पता है कि वे भीड़ में आसानी से बचकर निकल जायेंगें. यह एक औरतों को बताने का एक तरीका है कि सड़क पर मर्दों का एकाधिकार है. तुम्हारी जगह घर के अंदर है, यदि तुम बाहर सड़क पे निकलती हो तो तुम शिकार बन सकती हो. यह महिलाओं और उनकी घूमने फिरने की आज़ादी पर पितृसत्तात्मक नियंत्रण है. इसका पहनावे और आचार-व्यवहार से कुछ लेना देना नहीं है.
सड़कों/सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले यौनिक उत्पीडन के प्रकार
“यहाँ दो साल रहने के बाद, सड़कों पर मर्दों द्वारा लगातार मौखिक और शारीरिक यौन उत्पीडन झेलने के बाद, मैं खुशी से यह जगह छोड़ सकती हूँ. मैं गोरी (विदेशी) महिला हूँ जिसकी वजह से मैं इसका शिकार बन रही हूँ.” एक ब्रिटिश महिला जो यहाँ संस्कृत पढ़ने के लिए आई थी. [द हिंदू, 11/09/2005]
“चलती गाड़ी से उन्होंने मेरी शर्ट का कोलर खिंचा और मुझे कार से बाहर खींचने की कोशिश की. मैं गाड़ी चलाती रही और अपने मोबाईल से 100 नंबर डायल किया.” एक युवा महिला ड्राइवर, जिसे चार शराबी आदमियों ने दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के पास ही उसकी कार से उसे लगभग खींच लिया था. [टाइम्स ऑफ इंडिया, 25/08/2002]
ज्यादातर महिलाओं को कई तरीकों से उत्पीडन सहना पड़ता है.
नीचे दिए गाये कुछ ऐसे ही उत्पीडन के तरीके हैं :
- घूरना
- अश्लील इशारे करना
- अपना गुप्तांग दिखाना
- आपको घूरते हुए अपने गुप्तांग को खुजाना
- Scratching groin while staring at you
- छूना
- ऊपर से नीचे तक आपको जांचना
- चिकोटी काटना
- आँख मारना
- आपको महसूस करना
- गाने गाना
- आपको अश्लील नामों से बुलाना जैसे ‘सेक्सी’, ‘रानी’, ‘मिर्ची’, ‘पटाखा’, ‘बम’, ‘आइटम’, गुलाब जामुन’, ‘फुलझरी’, ‘लड्डू’ आदि
- आपके शारीर को छूते हुए निकल जाना
- आपके बहुत पास खड़े होना
- गाड़ी से आपका पीछा करना
- आपकी गाड़ी के पीछे जानबूझकर हार्न मारना
- चुम्बन की आवाज़ निकालना
- आपके सीने को घूरना
- व्यक्तिगत सवाल पूछना
- चुम्बन लेना या चुम्बन की मांग करना
- आपका पीछा करना
- अपने शरीर के अंगों को आपसे रगड़ना
- आपके सीने पर हाथ लगाना
- आपको धक्का मारना
आपको कैसा महसूस होता है जब आपके साथ उत्पीडन होता है? शुरुआत में शाक लगने के बाद तरह तरह की भावनाएं मन में आती हैं-डर, भय, गुस्सा, भ्रमित और सबसे ज्यादा असहायपन कि उत्पीडक बचकर निकल गया.
और फिर भी यहाँ महिलाएं हैं जो इसे यौन उत्पीडन कहना ही नहीं चाहती. हम बस साधारण तरीके से उत्पीडक की हरकतों के लिए बहाना ढूँढ लेते हैं. ‘लड़के तो ऐसे होंगे ही’, या ‘ आदमी आखिर आदमी ही होते हैं’ या ‘ये सारी बातें तो होती रहती हैं’. मगर यौन उत्पीडन का मतलब और इसकी गंभीरता उत्पीडक की मंशा से नहीं बल्कि उसकी हरकतों पर निर्भर करता है. कोई भी हरकत – बोलकर, अनबोला, शारीरिक, गैर शारीरिक, छिपा हुआ, खुलकर – यदि आपको उत्पीडन का भाव देता है तो वह यौन उत्पीडन है.
संभावित कदम
“ मैं हमेशा अपने आसपास का माहौल चेक कर लेती हूँ मगर कई बार ऐसा समय होता है जब आप ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं.” सीनियर वकील, दिल्ली, इंडिया टुडे, 20/10/2008
आप भीड़भरी बस में किनारे की सीट पर बैठी हैं और आपके पीछे खड़ा आदमी आपके शारीर को छूता हुआ अपनी देह रगड़ रहा है. आप क्या करेंगीं? ज्यदातर महिलाओं का कहना होगा कि वहाँ से हट जायेंगीं और इसे नज़रंदाज़ करेंगीं. मगर प्रतिक्रिया दिखाने का सिर्फ यही तरीका तो नहीं.
व्यक्तिगत सुरक्षा
“मैं देर तक बाहर रहती हूँ, काम की वजह से या लोगों से मिलने जुलने की वजह से. मैं मुंबई में लोकल ट्रेन से देर तक करीब 1 बजे तक बाहर रहती हूँ. और मैंने कभी भी असुरक्षा महसूस नहीं की. दिल्ली में ऐसा नहीं है, जहाँ जब भी मैंने पब्लिक जगह में पैर निकला तो पाया कि लोग मुझे घूर रहे हैं.” एक महिला ट्रावेलर, दिल्ली, द वीक, 19/10/2008
“हालांकि शारीरिक घाव भर जाता है, मगर मानसिक सदमे से बाहर आना मुश्किल था……हो सकता है कि मुंबई को सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती हो मगर यह मेरे लिए सच नहीं हुआ” 28 वर्षीय टीवी अधिकारी [इण्डिया टुडे, 20/10/2008]
सुरक्षा की भावना व्यक्ति के निजी अनुभव, पलेबढे होने और किसी निश्चित जगह पर एक्सपोजर पर निर्भर करता है. कोई पब्लिक जगह जो एक महिला के लिए सुरक्षित है वही दूसरे के लिए असुरक्षित हो सकती है. यह ज़रुरी है कि आप अपने तरीके से खतरे का सामना करने के उपाय तलाशें. आपकी अपनी चेतना और इन्द्रियां स्थिति को परखने के लिए सहायक हो सकती हैं.
- जब यह सार्वजनिक जगहों में होता है, आपका पहला मकसद होना चाहिए कि आप खुद को किसी खतरे की स्तिथि से दूर रखें.
- आपको चाकू या मिर्च पाउडर रखने की ज़रूरत नहीं है. बल्कि ऐसे सामान रखें जिसकी साधारण तौर पर ज़रूरत होती हैं जैसे पेन, डियोद्रेंट, सेफ्टी पिन, हेयर पिन, चाभी, किताबें, छाता, बेग, अपनी कोहिनी का इस्तेमाल आदि आपके हथियार हो सकते हैं.
- मगर शारीरिक जोर का इस्तेमाल आखिरी विकल्प के तौर पर करें.
- जब बाहर जाएँ तो सावधान रहें. अपने वातावरण के प्रति सावधान रहें, खासतौर से जब आप नए शहर में जा रही हों. अक्सर, आपकी फर्क पहचान आपके कपड़ों, बोली से समझ आ जाती है और हो सकता है कोई इसका फ़ायदा उठाये.
- जब सड़क पर चल रही हों तो ट्राफिक के उलटी तरफ चलें. इससे आपको मदद मिलेगी कि आप किसी कार/साईकिल/मोटरसाईकिल से होने वाले उत्पीडन के खतरे से बच पाएंगीं.
- यदि आप ऐसी स्थिति में फंस गई हैं जहाँ उत्पीडक हिंसक है, तो आप मीठी बातें करके या झूठे वादे करके उस स्तिथि से निकलने की कोशिश करें.
- जैसे ही उत्पीडक आपको परेशान करे आप विरोध करें. ज्यादातर समय उत्पीडक यह उम्मीद नहीं करता कि आप बोल पड़ेंगीं. वह आपको इसलिए निशाना बना रहा था क्योंकि उसने सोचा कि आप उससे डर जायेंगीं या शर्म के मारे कुछ नहीं कहेंगीं.
- यदि आप टेक्सी या ऑटो रिक्शा में हैं, चुपचाप नंबर प्लेट से नंबर लिख लें. यदि आप ऑफिस की टेक्सी में हों और देर रात जा रही हों तो भी ऐसा करें.
- अपने दोस्त/परिवार को बता दें कि आप कहाँ जा रही हैं. खासतौर से जब आप नए शहर में जा रही हों. उदाहरण के लिए, जैसे आप काम से घर लौट रही हों तो परिवार को खबर कर दें.
- इमरजेंसी संपर्क नंबर अपने साथ ही रखें. इस नंबर को आप स्पीड डायल में सुरक्षित करके रखें. इस तरह आप ज़रूरत के समय तुरंत इसका इस्तेमाल कर सकती हैं और घटना का गवाह भी तैयार होगा.
- जब ही आप डरी हुई या घबराहट महसूस करें तो तुरंत उसे कहें. यह परिस्थिति को संभल सकता है क्योंकि उत्पीडक आपसे ये उम्मीद नहीं करता कि आप विरोध में बोल पड़ेंगीं.
उत्पीडक का सामना करें
“ जब बस में कोई आदमी आपको छू रहा हो और धक्का दे रहा हो तो क्या आप बस से कूद जायेंगीं और एफ आई आर दर्ज करायेंगीं? हमने अपना ही तरीका निकला है जो एफ आई आर दर्ज कराने से ज्यादा असरदार है – जैसे, थप्पड़ मारना या उत्पीडक को सबसे सामने चिल्ला कर शर्मिंदा करना.”
– वोमेन फ़ीचर सर्विस, 23/05/2009
नहीं – आप पुलिस के पास नहीं जा सकतीं कि कोई राह चलता आपको गन्दी नज़र से देख रहा है या जानबूझकर आपको धक्का मारकर निकल गया हो या साधारण तरह से ही देख रहा हो. आप क्या करेंगीं? उसका सामना करना ज्यादा असरकारक होगा. उसकी हरकत को नाम लेकर टोक कर आप उसे चकित कर दें और पब्लिक में शर्मिंदा करें.
भारतीय महिलाएं सदियों से यौन उत्पीडन को चुप्पी के साथ सहने के लिए ट्रेंड की गई हैं. किशोरियों को उनकी माएं सलाह देती हैं – “ जब तुम बाहर सड़क पर हो तो कोई भी अश्लील नज़र और टिप्पणी को अनदेखा करो. अपना सम्मान बनाये रखो.” लेकिन आपना विरोध जताने में अपने सम्मान की रक्षा ज्यादा है. किसी को भी यह अधिकार नहीं कि आपको यौनिक रूप से उत्पीडित करे. आप न केवल खुद पर होने वाले उत्पीडन को रोकती हैं बल्कि उत्पीडक को अगली दफा किसी के साथ उत्पीडन करने से पहले सोचने पर भी मजबूर करती हैं. कभी कभी उत्पीडक आपके कुछ कहने करने के पहले ही झट से गायब हो जाता है. यदि उत्पीडक बच निकलता है तो खुद को ना कोसें. याद रखें, उसने पहले से ही बच निकलने के लिए अपना रास्ता सोच रखा होता है. आपका गुस्सा जायज है, मगर अपराधबोध नहीं. यह आपके साथ हुआ इसमें आपकी कोई गल्ती नहीं है.
उत्पीडक का प्रोफाइल
ज्यादातर उत्पीडक अपना शिकार सावधानी से चुनते हैं. उसका दिमाग कैसे काम करता है यह जनना आपके लिए महत्वपूर्ण है ताकि आप उससे अच्छी तरह सामना कर सकें.
उत्पीडक अधिकतर सार्वजनिक जगहों पर हमला करता है, यदि……
- जब उन्हें लगता है कि शिकार आसानी से हाथ लग जाएगा (जो कि, असावधान, शर्मीली या डरी हुई)
- उन्हें लगता है कि आप बाहर की हो, कोई टूरिस्ट या यदि आप उस जगह में नई हो.
- उन्हें लगता है कि वे आसानी से बच निकलेंगें.
- उन्हें लगता है आप कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगीं और चुपचाप सहेंगी.
- उन्हें लगता है कि वे आपको डरा धमका लेंगें
- वे भीड़भाड़ वाली जगह का इस्तेमाल आसानी से बच निकलने के लिए करते हैं या अपने फायदे के लिए करते हैं.
उत्पीडक से सामना करने के लिए ‘क्या करना चाहिए’ और ‘क्या नहीं करना चाहिए’ इसके बारे में जानें
क्या करना चाहिए
- अपने रवैये को सीधा और स्पष्ट रखें. उसने क्या किया वही कहें और कैसे ये आपके लिए सहनीय नहीं है. अगर ज़रूरत हो तो पहले से ही अभ्यास करें, “ तुमने अभी………..यह यौन उत्पीडन है. औरतों को उत्पीडित करना बंद करों!”
- यदि आप भीड़ भरी बस में या टेक्सी में हों, उसे कहिये कि वे वहाँ से हटे. आप ऐसे कहें कि उसे ये सन्देश पहुंचे कि उसका इस तरह से खड़ा होना आपको पसंद नहीं है. उसे कहिये कि वे हट जाये खासतौर पर जब जगह हो.
- उसकी हरकत को सबके सामने लाएं. उसकी हरकत को जैसे हुई वैसे ही बयान करें. जैसे, ‘घूरना बंद करो. क्या पहले कोई लड़की नहीं देखी?” जोर से और स्पष्ट रूप से कहें.
- उसे शर्मिंदा करें
- आपनी आवाज़ को गंभीर रखें
- सामना करते समय अपने शारीर की भाषा पर नियंत्रण रखें. मजबूत रहें और उसकी आँखों में सीधे देखें. बात करते समय सीधी खड़ी रहें और अपनी आवाज़ स्थिर रखें.
- याद रखें, मजाक करने की कला के यौन उत्पीडन से कुछ लेना देना नहीं है. उत्पीडक को बताएं की वो बहुत बेकार है, यदि उसे लगता है कि वह आपकी कीमत पर मजा कर सकता है.
- याद रखें, कि यह आपके नियंत्रण में है कि आप बातचीत कब खतम करें. आपको लागतात उससे बहस करते रहने की ज़रूरत नहीं है और ना ही उसके स्पष्टीकरण को सुनाने की ज़रूरत है. यदि वह बहस करता है तो उसकी बात बीच में ही काट कर बातचीत को खतम कर दें.
क्या ना करें
- बात करते समय लडखडाना, हंसना, मुस्कुराना और रोना
- उसके ऊपर कुछ फेंक कर ना मारें. उससे बात करते समय ज्यादा भावुक ना हों
- उससे सामना करते समय ज़रूरत से ज्यादा नम्र, कमजोर ना हों
- उत्पीडक के हरकत के लिए कोई बहाना ना दें. या उसका बचाव करें. उसके हरकत से यदि आपको आपत्ति हुई है तो कहें. उसके बुरे बर्ताव को यह कहकर अनदेखा ना करें कि वो आपको चाहता है, या उसका स्वभाव ही ऐसा है और वह खुद की मादद नहीं कर सकता. इसे
- अनदेखा ना करें कि आपके साथ ये हुआ है.
- उसके बहाने और बहस की प्रतिक्रिया ना दें. यदि ज़रूरत हो तो उसे टोक दें.
- यदि ज़रूरत हो तो शारीरिक प्रतिक्रिया देने से ना हिचकिचाएं
- उत्पीडक के हरकत के लिए खुद को दोषी ना ठहराएं
- बातचीत को ज्यादा ना खींचें. इसे जल्दी और सटीक रखें
- यह ना सोचें कि यौन उत्पीडन सहने में आप अकेली हैं. औरों को भी शामिल करें
अपना कॉमन सेन्स इस्तेमाल करें
यदि ज़रूरत हो तो भीड़ इकठ्ठा करें. अपने आसपास लोगों से मदद लें, खासतौर पर जब आपकी सुरक्षा खतरे में हो. हरकत को नाम देने से ना हिचकिचाएं.
जोर से चिल्लाकर बताएं कि उत्पीडक ने क्या किया अरे यह यौन उत्पीडन है. उत्पीडक यह उम्मीद नहीं करता कि आप उसकी हरकत को सबके सामने ले आयेंगीं. भीड़ इकट्ठा करने से न केवल उसे शर्मिंदगी होगी बल्कि उसका भाग निकलना और मुश्किल हो जायेगा. जैसे कि भीड़ का फ़ायदा उठाकर उत्पीडक अपनी हरकत करता है उसी तरह आप भी भीड़ का फ़ायदा उठाकर अपनी सुरक्षा का इंतजाम करें.
जब भीड़ मदद करने से मना कर दे
हलांकि, किसी परिस्थिति में आप किसी की मदद चाहती हैं और लोग कुछ मदद नहीं करते, तो भीड़ में कुछ खास लोगों को मदद करने के लिए कहें. जोर से कहें ‘सर/मैडम मुझे आपके मदद की ज़रूरत है यह आदमी मुझे परेशान कर रहा है’.
कभी कभी लोग कन्फ्यूजड हो जाते हैं जब किसी परिस्थिति में उनके ध्यान को आकर्षित किया जाता है. सहायता के लिए बुलाने में स्पष्ट रखें. जिस व्यक्ति की मदद चाहिए उसे सीधे पुकारें.
यदि तब भी आपके आसपास लोग मदद के लिए नहीं आते, तो समझ जाएँ कि वे किसी मुसीबत में खुद को नहीं डालना चाहते. हेल्पलाईन पर फोन करें (मुंबई में हैं तो 103 डायल करें और दिल्ली में तो 1091 डायल करें) या फिर 100 नंबर पर पुलिस को.
अपनी खुद की रणनीति बनायें
यहाँ पर कुछ सच्ची घटनाएँ दी गई हैं कि कैसे महिलाएं यौन उत्पीडन से सामना करने के लिए रणनीति बनाती हैं. आपकी सुझबुझ आपको आने वाले नुकसान से बचाती है.
नंदिनी, दिल्ली के एक कॉलेज की छात्रा ने एक दिन घर जाते नोटिस किया कि कोई आदमी बाईक पर उसे देख रहा है. उसकी मंशा को समझते हुए उसने रोड़ क्रास कर उसे नज़रंदाज़ करने के लिए जो पहली बस आई उसे पकड़ ली. वह जैसे ही बस से उतरी उसे आभास हुआ कि वह आदमी पीछा करते करते वहाँ तक पहुँच गया. उस आदमी ने उससे चुम्बन की मांग की. नंदिनी ने दर्शाया कि वह भी उससे आकर्षित हो गई है और उससे अगले दिन मिलने के लिए सहमत हो गई…..कहने के ज़रूरत नहीं कि वह उस आदमी से मिलने अगले दिन नहीं गई. [‘गर्ल्स फाइट बैक’ जागोरी द्वारा] यह स्मार्ट रणनीतियाँ कई तरह की हो सकती हैं उत्पीडक से मीठी बात करना, मोलतोल करना, झूठा वादा करना, वही कहना जो वह सुनना चाहता है, अपने बारे में गलत जानकारी देना. यह सब करने का मतलब है कि उत्पीडक ये सब उम्मीद ना करे, और आप परिस्थिति से सुरक्षित बचकर बाहर निकल आयें.
यौन उत्पीडन से बच निकलना इससे सामना करने का बेहतर उपाय है. आपनी चेतना का इस्तेमाल परिस्थिति को समझने के लिए करें.
सुरक्षा के कुछ उपाय
एक औरत को एक आदमी चलती बस में उत्पीडित कर रहा था, जो अपने गुप्तांग को निकल कर दिखा रहा था. यह देखकर घबराने और शर्माने की बजाय वह हंसी और जोर से उसकी तरफ इशरा करते हुए बोली कि ‘ओह ये कितना छोटा है!’ वह आदमी इतना शर्मिंदा हुआ कि बस से तुरंत ही उतर गया! [सच्ची घटनाएँ, ‘गर्ल्स फाइट बैक से, जागोरी द्वारा]
- डर की किसी भी स्थिति से खुद को तुरंत हटा लें
- यदि आप पाती हैं कि कोई अजनबी आपको घूर रहा है, तो उसे तीन सेकेण्ड के लिए देखें (उससे ज्यादा नहीं) आप उसे पूरा ऊपर से नीचे देखें फिर अपना चेहरा घुमा लें. यह साधारण सी प्रक्रिया ये कहती है कि आप उस आदमी में कोई रूचि नहीं रखती हैं.
- यदि आपको लगता है कि कोई कार आपका पीछा कर रही है, तो सड़क क्रास करके दूसरी तरफ चली आयें और उलटी दिशा में चलने लगें.
- सड़क पर चलते समय ट्राफिक की उलटी दिशा में चलें.
- जो महिलाएं पालतू कुत्तों के साथ घुमती हैं उनके साथ कम उत्पीडन होता है
- किसी अजनबी (लोकल ट्रांसपोर्ट में सफर करते हुए सहयात्री से) से बात करते हुए आपना असली नाम और अपने बारे में सही जानकारी ना दें. इसका खास पालन करना चाहिए खासतौर से जब आप किसी नए शहर में यात्रा कर रही हों. जब आप नहीं चाहतीं तब आपको बात नहीं करनी चाहिए.
- जब यात्रा करनी हैं तो टेक्सी और ऑटो रिक्शा लेने की तुलना में बस और ट्रेन से सफर करना ज्यादा सुरक्षित है.
- यदि आप किसी आदमी से साथ लिफ्ट में जाने से असहज महसूस करती हैं तो ना जाएँ.
- यदि ज़रूरत हो तो शारीरिक बल का प्रयोग करने के लिए अपने आपको मानसिक रूप से तैयार करें. आँखें, गुप्तांग और गला कमजोर जगहें होती हैं. सरल उपाय जैसे उत्पीडक की आँखों में धूल फेंक देना ही आपको वहाँ से बच निकलने के लिए मौका दे सकता है.
- अपने आसपास के वातावरण के प्रति सावधान रहें – आवाज़, लोग आदि. उदाहरण के लिए कानों में इयर प्लग लगाकर चलने से आपको पता नहीं चल पायेगा यदि कोई आपके पीछे से हमला करता है.
बाँटना (शेयरिंग)
“ लोग दौड़ते हुए आकार मेरे पीछे या छाती पकड़ लेते हैं और या जानबूझकर मुझे धक्का मारकर निकल जाते हैं. यह बहुत जल्दी होता है. मैं आपने बॉय फ्रेंड के साथ हूँ तब भी कोई फर्क नहीं पड़ता. इसके बाद मुझे सदमा लगा और तनाव हुआ. बहुत गुस्सा और हीन महसूस हुआ. इस बारे में बात करने के किये कोई नहीं है.” लौरा नयूहुस, [एस ए डब्ल्यू एफ वेबसाइट, 17/7/2006]
जब आपका यौन उत्पीडन हुआ हो, यह महत्वपूर्ण है कि आप किसी भरोसेमंद दोस्त या किसी परिवार के सदस्य से बताएं. इससे न केवल गवाह तैयार करने में मदद मिलेगी बल्कि दोस्त और परिवार के सदस्य आपको मदद करने के महत्वपूर्ण स्त्रोत बन सकते हैं. रिसर्च अध्ययन के अनुसार जिन महिलाओं ने तनाव और सदमे को किसी से बताया वे जल्दी इस तरह के हादसे से उबर पाती हैं.
पुलिस के पास जाना
“यह कानून कमजोर है, इसे कड़े क़ानूनी अपराध की तरह नहीं देखा जाता है. और यौन उत्पीडन के केसों को फोलोअप करने में प्रशाशिनिक रुकावटें भी आती हैं. शिकायत दर्ज करने के कुछ महीनों के बाद महिलाएं हताश हो जाती हैं और उन्हें लगने लगता है कि मौजूदा कानून के अंदर कोई समाधान नहीं है.”जसविन आलूवालिया. आई एफ ई एस, जयपुर, [द हिंदू, 11/09/2005]
पुलिस के पास जाने में अपनी ही एक चुनौती है जिसके लिए आपको मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए. पुलिस की लोगों के प्रति सवेंदनशीलता जानीपहचानी है. फिर भी यौन उत्पीडन के केस की रिपोर्ट करना ज़रुरी है. आपको आपके क़ानूनी अधिकार के बारे में पता होना चाहिए. आपको यह जानना ज़रुरी है कि कानून के तहत यौन उत्पीडन क्या है और यह किस सेक्शन के अंतर्गत आता है. आपको जानना है कि एफ आई आर क्या होती है. यदि ज़रूरत हो तो अपने साथ दोस्त या परिवार के सदस्य को पुलिस स्टेशन ले जाएँ.


