घर
हमारा घर अंतिम जगह होगा जहाँ हमारा उत्पीडन होगा. मगर यह दुःख की बात है कि यह उन जगहों में से एक है जहाँ औरत के खिलाफ हिंसा की शुरुआत होती है.
“ मेरा बुजुर्ग मकान मालिक मेरे बारे में निजी सवाल करता है, मेरे परिवार के बारे में यहाँ तक कि मेरे पुरुष मित्रों के बारे में. कभी कभी वह मुझे असमय बुलाता है और मुझपर टिप्पड़ी करता है.”
“ मेरे पति का करीबी का दोस्त एक बार घर आया जबकि उसे पता था कि मेरे पति काम के लिए गए होंगे. मैं बिल्कुल अवाक् हो गई जब उसने मुझसे निजी सवाल करने शुरू किये जैसे कि क्या मैं अपने पति के साथ खुश हूँ, और वह मुझे ज्यादा खुश रख सकता है. इस घटना के बारे में अपने पति से बात करते हुए मैं डरती हूँ….इस बात से मैं इतनी परेशान हूँ. क्या मेरे पति मुझपर विश्वास करेंगे?”
घर के अंदर यौन उत्पीडन को पह्चानना बहुत ही ज़रूरी है. यह लंबे समय के लिए हो सकता है या गंभीर उत्पीडन में भी बदल सकता है.
यह क्या है?
घर में होने वाली यौन हिंसा क्या है?
यौन उत्पीडन में शामिल है अनचाहा यौनिक बर्ताव जैसे शारीरिक रूप से छूना या अश्लील टिप्पड़ी करना, अनचाहा यौनिक सम्बन्ध/ संपर्क की मांग करना या निवेदन करना या अन्य अनचाही यौनिक हरकत. यदि यह घर में या घर के आसपास उनलोगों द्वारा होता है जिन्हें हम जानते हैं (अंकल, पिता के दोस्त, दूर के रिश्तेदार, सुरक्षा कर्मी, दोस्त, एक ही कॉलोनी में रहने वाले, पड़ोसी आदि) तो यह घर में होने वाला यौन उत्पीडन कहलाता है.
घर में होने वाला यौन उत्पीडन क्यों गंभीर है?
घर में होने वाला यौन उत्पीडन इसलिए गंभीर है क्योंकि यहाँ आप उत्पीडक को जानती हैं और जो कि और भी ज्यादा तकलीफ़देह बात है. उत्पीडक आपका अंकल, परिवार के दोस्त का लड़का, दूर का रिश्तेदार, पड़ोसी, माकन मालिक और अपने ही पिता या भाई का दोस्त हो सकता है
एन सी आर बी के आंकड़ों के अनुसार 18555 बलात्कार के केसों में उत्पीडक हिंसा सहने वाली के जान पहचान के थे, 35,2% पड़ोसी, 7.4% रिश्तेदार, 2% अपने अभिवावक, और 55.4% अन्य जानपहचान वाले थे.
घटनाओं अपराधी परिवार के करीब है और अपने ठिकाने और दैनिक कार्यक्रम जानता है, खासकर अगर पूर्वचिन्तित जा सकता है।
कौन कर सकता है ?
कोई भी मर्द संभावित उत्पीडक हो सकता है: दूर का भाई, परिवार का दोस्त, दोस्त, पड़ोसी, पिता का दोस्त, भाई का दोस्त, दूर का संबंधी, करीब का रिश्तेदार, पड़ोसी का बेटा, मकान मालिक, सुरक्षा कर्मी, घरेलु कामगार, पोस्टमैन, प्लंबर मिस्त्री, बिजली मिस्त्री, सब्जीवाला, सेल्समैन, दोस्त का दोस्त और अजनबी, अन्य भी कोई.
“मेरे मामा हमारे साथ कुछ दिन के लिए रहने आये. शुरू में मुझे लगा कि वे बहुत ही मिलनसार हैं. लेकिन फिर बाद में वह मुझे देर तक गले लगाने लगे, मेरे हाथ और कन्धों को रगड़ने लगे, और एक दिन तो उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रखा. हालांकि उन्होंने तुरंत मुझसे माफ़ी मांगी, मगर मुझे पता था कि यह भूल से नहीं हुआ था. अब उनसे मुझे बहुत ही असहजता महसूस होती है.”
उम्र और वैवाहिक स्तर से कुछ फर्क नहीं पड़ता है (उत्पीडक की या पीड़िता की) जो किसी को उत्पीडन करने से या उत्पीडन सहने से रोक सके.
क्यों यह कानून के नज़र से ओझल और पहचाना नहीं जाता?
यह इसलिए छिपा हुआ है क्योंकि कई लोग इसके खिलाफ रिपोर्ट ही नहीं करते ना कि इसलिए कि यह होता ही नहीं है.
1.महिलाओं को डर रहता है कि उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जायेगा या उनका मजाक उड़ाया जायेगा.
2.हो सकता है कि उत्पीडन सहने वाली महिला ये सोचे कि इसमें उसीकी गल्ती थी.
3.जब परिवार के अंदर यौन उत्पीडन होता है तो इसे छुपाने और रफादफा करने का दबाव रहता है
4.गवाह जो परिवार के ही सदस्य हैं वे क़ानूनी प्रक्रिया के समय पीछे हट जाते हैं.
5.यह विश्वास किया जाता है कि यौन उत्पीडन से महिला इज्ज़त चली जाती है. रिपोर्ट करने से आगे उसकी और बदनामी होगी.
क्या घर में होने वाला यौन उत्पीडन और बाल यौन हिंसा एक ही है?
यौन उत्पीडन और बाल यौन हिंसा एकदूसरे से जुड़े हैं मगर एक ही नहीं हैं. बाल यौन हिंसा में हिंसा की शिकार एक अल्प वयसी है यानि 18 वर्ष से कम. जबकि यौन उत्पीडन कार्यस्थल पर, गली में, घर और कॉलेज में, अन्य के बीच हो सकता है. बाल यौन हिंसा प्राइवेट जगहों में होता है.
क्या घर में होने वाला यौन उत्पीडन घरेलु हिंसा से फर्क है?
यह निर्भर करता है. यौन उत्पीडन यदि रिश्तेदार, पति या साथ में रहने वाला साथी द्वारा किया जाता है जो एक ही छत के नीचे रहते हैं तो वह घरेलु हिंसा के दायरे में आएगा. जबकि उस केस में जब उत्पीडक परिवार का सदस्य तो है मगर एक ही घर के छत के नीचे नहीं रहता तो यौन उत्पीडन कहलायेगा.
संभावित कदम
यदि आप इस समय घर के भीतर यौन उत्पीडन सह रही हैं तो आपका पहला कदम इसे रोकने का है. आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आप सुरक्षित हैं. इसके आलावा आपको यह अकेले सहने की ज़रूरत नहीं है. जिनपर आपको भरोसा हो उनको बताएं, खासतौर से जब आप 18 वर्ष से कम उम्र की हैं.
आप अकेले ना बर्दाश्त करके इसे रोक सकती हैं. मदद मांगें. इसके बारे में रिपोर्ट करें. याद रखें कि यौन उत्पीडन एक जुर्म है. इसके बारे में रिपोर्ट करना न्याय पाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है. शायद आप अन्य लोगों को सामान उत्पीडन की स्थित से गुजरने के लिए बचा सकती हैं.
व्यक्तिगत सुरक्षा
आपकी पहली प्राथमिकता है खुद की सुरक्षा. खुद को बचाने और अपने वातावरण को सुरक्षित रखना आपका मकसद होना चाहिये.
नीचे दी गई सुरक्षा की रणनीति पूरी नहीं है. आपकी व्यक्तिगत यौन उत्पीडन की समस्या को शायद अलग तरह के उपाय की ज़रूरत हो.
- यदि संभव हो तो खुद को तुरंत खतरे की स्थिति से हटा लें. जो भी तरीका काम आये उसे अपनाएं. कभो कभी मीठी बातें या थोड़ी बातें आपको स्थिति से बचने के बारे में सोचने के लिए समय दे सकती हैं.
- उत्पीडक के साथ अकेले रहने की स्थिति ना आने दें. आप सुनिश्चित करें कि जब उत्पीडक आसपास हो तो और लोग भी वहाँ हों. अकेला पाकर हो सकता है कि उत्पीडक आपको घेरने की कोशिश करे. मगर पहले से ही उसकी हरकतों के प्रति सावधान रहने से हो सकता है आप खतरे कि स्थिति से बच जाएँ.
- एमरजेंसी फोन नंबर सब समय अपने हाथ में रखें. अपने मोबाईल फोन में इस नंबर को स्पीड डायल नंबर पर दर्ज कर लें. इस तरह से आपको जब ज़रूरत होगी तो आप तुरंत फोन कर पाएंगीं और यह घटना का अहम सबूत भी होगा.
- आपको आत्म रक्षा क्लास ज्वाइन करने की ज़रूरत नहीं है (हालांकि यह अच्छा उपाय है यदि आपका पीछा किया जा रहा है) लेकिन घर के मामूली चीज़ें इस्तेमाल करने से मत हिचकिचाइए (कैंची, सेफ्टी पिन, चाकू वगैरह) या आप अपनी कोहिनी को भी हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकती हैं.
- एक पालतू जानवर के रूप में एक कुत्ते के बाद सुरक्षा की अपनी भावना को बनाए रखने के लिए एक अच्छा विचार है।
- आपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करके, जैसे सावधान रहकर, अपने मन की बात पर भरोसा करके, कॉमन सेन्स से, शारीरिक मजबूती से अपनी सुरक्षा कर सकती हैं.
- बिजली या पानी ठीक करने वालों को बिना उनके पहचान पत्र देखे घर के अंदर ना आने दें. यदि फिर भी आपको असहज लगता है तो उन्हें बाद में आने के लिए कहें जब घर में और लोग भी मौज़ूद हों.
उत्पीडक से सामना करना
उत्पीडक बहुत ही सावधानी से अपना शिकार ढूंढते हैं. वे ऐसी लड़की की तलाश में रहते हैं जो चुप रहेगी या विरोध नहीं करेगी. उन्हें नज़रंदाज़ करना थोड़े समय का ही समाधान है.
चुप्पी को कई बार उत्पीडक जानबूझकर आपकी सहमति समझते हैं. उत्पीडक से सामना करने का सही तरीका है कि आप उसकी हरकत को जोर से बोलकर रोकें, जिसकी उम्मीद उसे नहीं होती है. आप जबतक चुप रहेंगी तबतक उत्पीडक का आपके ऊपर नियंत्रण बना रहता है. जैसे ही आप उसकी हरकत को नाम देकर रोकती हैं, आप उसे ये सन्देश देती हैं कि आप के ऊपर उसकी मर्ज़ी नहीं चलेगी. आप उसे बताती हैं कि उसने आपका दायरा तोड़ा है और उसकी यह हरकत आपके साथ नहीं चलेगी. उसे तुरंत वे हरकत वहीँ रोकनी होगी.
हम सभी सशक्त होकर पैदा नहीं होते, तो इसका अभ्यास करना आवश्यक है. अपने व्यक्तिगत दायरों के बारे में जाने और जब इसका उलंघन हो तो सतर्क हो जाएँ. याद रखें कि आप उत्पीडक के हरकत का विरोध कर रही हैं जो आपको असहज बना रहा है ना कि आप उत्पीडक पर कोई हमला कर रही हैं.
उत्पीडक के साथ सामना करने के कुछ तरीके
- अपनी बात स्पष्ट, जोर से और सटीक रूप से कहें. ज़रूरत हो तो इसका अभ्यास करें. धीरे से और फुसफुसा कर अपनी बात ना कहें.
- जब आप बोलते हैं, सटीक जोर से और स्पष्ट है। एक नहीं, बकवास टोन का प्रयोग करें। यदि आवश्यक हो तो अभ्यास करें। कानाफूसी या धीरे बात मत करो।
- उसने जो किया है उसके लिए उसे ज़वाबदेह बनायें. आप कहें, “तुमने (विवरण के साथ)………….जो किया वो यौन उत्पीडन है. मुझे परेशान करना बंद करो.” छोटे वाक्य बनायें; उत्पीडक से कोई सवाल ना करें वरना इससे उसे बहाने बनाने का मौका मिल जाएगा.
- आप मजबूत रहें, और अपनी बात पर डिगी रहें.
- यह आपका अधिकार है कि आप बातचीत खतम करें. आपको उसकी बात सुनने या उसे कुछ स्पष्टीकरण देने का मौका देने की ज़रूरत नहीं है. यदि वह बहस करता है तो तुरंत बातचीत बंद कर दें.
उत्पीडन को डोक्युमेंट (दस्तावेज) करना
इस बात का नोट रखें कि कब (तारीख, दिन और समय), कहाँ और किसके द्वारा आपका उत्पीडन हुआ था. नोट रखें कि किस तरह से उत्पीडन हुआ था और उत्पीडक की पहचान क्या है. यह बहुत ही ज़रुरी है यदि आप क़ानूनी कार्यवाई करना चाहती हैं. यदि आप लगातार उत्पीडन सह रही हैं तो इसे डोक्युमेंट में नोट करें कि आपको कैसा महसूस हुआ और आपने कैसे अपनी प्रतिक्रिया दी.
दूसरों से बाँटना (शेयर करना)
आप जब तक यौन उत्पीडन के बारे में चुप रहेंगी तबतक आप उत्पीडक को यह ताकत दे रही हैं कि वह अपना उत्पीडन जारी रखे. जब आप किसी से इस बारे में बाँटती हैं तो आप यौन उत्पीडन को व्यक्तिगत स्तर से राजनैतिक स्तर तक ले जाती हैं.
भरोसेमंद परिवार के सदस्य या दोस्त के साथ बाँटने में सिर्फ आपकी ही सुरक्षा नहीं है बल्कि इससे आप गवाह तैयार कर रही हैं. किसी से बाँटने से आपको अपनी भावनाओं और सदमे से सामना करने में मदद मिलती है.
यदि उत्पीडक परिवार का ही कोई सदस्य है तो बाँटने से आप परिवार के किसी अन्य सदस्य को ऐसी ही घटना से बचाती हैं.
आपके लिए बाँटना मुश्किल हो सकता है. लेकिन ऐसा ना करके आप ना केवल यौन उत्पीडन का समर्थन कर रही हैं बल्कि उत्पीडक का भी आपकी चुप्पी से हौसला बढ़ रहा है. इसलिए खामोश ना रहें, बोलें. यहाँ उत्पीडक की गल्ती है ना कि आपकी.
एक सुरक्षित पड़ोस
स्थानीय समुदाय एक महत्वपूर्ण सुरक्षा का उपाय है. जब ज़रूरत हो तो आप पड़ोसी को मदद के लिए बुलाने से झिझकें नहीं. याद रखें आपके साथ यौन उत्पीडन हुआ है इसमें आपकी गल्ती नहीं बल्कि उस उत्पीडक की है.
एक सुरक्षित पड़ोस का मतलब ना केवल एक सामाजिक जागरूक जगह का मौजूद होना है बल्कि यह आपको सुरक्षित भी रखता है. अपने रिहायशी इलाके में आप उत्पीडन जैसे हमले के वक्त किसे बुला सकती हैं इसे जानें. यौन उत्पीडन के खिलाफ़ सामाजिक चेतना जगाना इसे रोकने का महत्वपूर्ण तरीका है. सुरक्षित पड़ोस के लिए पहले से तैयारी में नीचे दी गई बातें शामिल हैं.
- गली में लाइट, पब्लिक टेलीफ़ोन बूथ आदि जैसी सुविधा होना
- सार्वजनिक शौचालय में अच्छी लाइट और दरवाज़ों में लॉक का इंतज़ाम होना
- गाडी या पैदल सुरक्षा गार्डों द्वारा लगातार चक्कर लगवाना
- कॉलोनी में पड़ोसियों से मिलने आने वाले विसिटर्स की जांच करना. आने वालों के संपर्क नंबर और वो किससे मिलने आया है इसका रजिस्टर रखना.
- कॉलोनी में रहने वाले लोग अपने इलाके में लोगों को यौन उत्पीडन कानून के बारे में जानकारी दे सकते हैं, एमरजेंसी में ज़रुरी संपर्क की लिस्ट तैयार रख सखते हैं, जैसे कि पुलिस की, हेल्पलाईन की और एम्बुलेन्स की.
- महिला और पुरुष दोनों को शामिल करते हुए अपने इलाके में यौन उत्पीडन के बारे में जागरूकता अभियान चलायें. इस सामुदिक प्रोजेक्ट में युवा लोगों को शामिल करें, जैसा कि वे बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
- रिहायशी इलाके/ कॉलोनी मिलकर गली में लड़कियों के साथ यौन उत्पीडन करने वाले लड़कों को सबक सीखा सकते हैं. इस तरह के केसों में, लड़कों को चेतावनी देने या पुलिस में शिकायत दर्ज करने से लंबे समय तक लड़कियां खुद को इलाके में सुरक्षित महसूस कर सकती हैं.
क़ानूनी उपाय
यौन उत्पीडन एक अपराध है. लेकिन जब यह घर में घटित होता है तो क़ानूनी तरीका इस्तेमाल करना कठिन हो जाता है.
यदि आपको लगता है कि आपको क़ानूनी रास्ता अपनाना होगा तो नीचे दी गई जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है:
आपराधिक तरीका
जब आप आपराधिक केस फाइल करने का चुनाव करते हैं, तो आपको इसकी जानकारी होना ज़रुरी है.
- आपराधिक तरीके की शुरुआत एफ आई आर दर्ज करवा कर होती है. यह पहला जानकारी रिपोर्ट है जिसे पीड़िता पुलिस को देती है और इसके बाद ही न्याय के लिए प्रक्रिया शुरू होती है. हालांकि, एफ आई आर दर्ज कराने के पहले कग्निजिबल और नॉन- कग्निजिबल के बीच के फर्क को समझ लेना चाहिए. यौन उत्पीडन एक कग्निजिबल अपराध है.
- एक बार जब एफ आई आर दर्ज हो जाता है तब एक जांच अधिकारी को मामले की जांच की ज़िम्मेदारी दी जाती है. इस जांच के आधार पर पुलिस तय करती है कि आरोपी को गिरफ्तार किया जाए या नहीं. जांच के बाद पुलिस को एक चार्ज शीट तैयार करनी होती है जिसे मजिस्ट्रेट के सामने जमा देना होता है.
- इसके बाद केस को कोर्ट के पेश किया जाता है, जहाँ आरोपी या तो न्यायिक हिरासत (कग्निजिबल केस के लिए) में भेजा जाता है या पुलिस और आगे जांच के लिए आदेश लेती है (नॉन- कग्निजिबल केस के लिए).
- कोर्ट द्वारा फिर आरोपों की जांच और बहस होती है, जहाँ आरोपी से उसने अपराध किया या नहीं के लिए अपना पक्ष रखने के लिये कहा जाता है.
- गवाहों और सबूतों दोनों ही पक्ष (आरोपी और बचाव) द्वारा फिर से जांच किया जाता है.
- दोनों पक्षों द्वारा बहस और तर्क पेश किये जाते हैं
- अंत में फैसला सुनाया जाता है, जहाँ आरोपी को या तो सज़ा दी जाती है या उसे छोड़ दिया जाता है.
पुलिस द्वारा तुरंत कार्यवाई
यदि आप किसी ऐसी स्थिति में फंसी हैं जहाँ आपको पुलिस की मदद तुरंत चाहिए तो 100 नंबर पर फोन करने से ना हिचकिचाएं. आपका फोन तुरंत पास के पुलिस कंट्रोल रूम में पहुँच जाएगा.
प्राथमिक जानकारी रिपोर्ट (एफ आई आर) दर्ज करना
यौन उत्पीडन को रोकने का तरीका है इसकी पहचान. आपको अक्सर लोग यह कहते हुए मिल जायेंगे कि इसका कुछ मतलब नहीं है या आप कुछ जयादा ही इसे तूल दे रही हैं. कुछ लोंगों के लिए यह “टाइम-पास” हो सकता है मगर एफ आई आर दर्ज करवा कर आप उन्हें बताती हैं कि यह एक अपराध है.
एफ आई आर दर्ज करते समय नीचे दी गई बातों का ध्यान रखें………
- एफ आई आर हमेशा पुलिस स्टेशन में दर्ज करना होता है. हालांकि यह ज़रुरी नहीं कि इसे पीड़िता को ही दर्ज करना चाहिए. यह गवाह या पुलिस अधिकारी (जिसे अपराध के बारे में जानकारी हो) द्वारा भी दर्ज कराया जा सकता.
- एफ आई आर दर्ज करने में बहुत देरी ना करें. यह बात सच है कि आप पूरे मामले को लेकर बहुत चिंतित हैं मगर बिला वजह देर करने से क़ानूनी प्रक्रिया में रुकावट हो सकती है.
- एफ आई आर में यौन उत्पीडन की घटना होने का समय, स्थान और तारीख, आरोपी की पहचान या अन्य किसी ने जो उसकी मदद की है, वो दर्ज होनी चाहिए. यदि उत्पीडक कोई अजनबी था, तो जितना हो सके घटना और उत्पीडक के बारे में जानकारी दें.
- जितना संभव हो घटना के बारे में सही सही जानकारी दें. उदाहरण के लिए यदि आपको कोई पकड़े या छुये तो आपको बताना चाहिए कि कैसे और कहाँ.
- यदि आपको आरोपी की तरफ से लगातार धमकी या आपकी व्यक्तिगत सुरक्षा को कोई खतरा है तो एफ आई आर में इसका ज़िक्र करें.
- जिस इलाके में यौन उत्पीडन की घटना हुई है वहीँ केस का एफ आई आर दर्ज होना चाहिए. यदि आपके साथ यौन उत्पीडन आपके घर या उत्पीडक के घर जहाँ भी हो उसी इलाके के पुलिस स्टेशन में आपको जाना चाहिए.
- साइन करने से पहले एक बार एफ आई आर को दोबारा पढ़ लेना चाहिए
- एफ आई आर की कॉपी पर ड्यूटी अधिकारी का साइन और पुलिस स्टेशन स्टाम्प होना चाहिए.
- आपको एफ आई आर की एक कॉपी मुफ्त मिलनी चाहिए यह आपका अधिकार है
- आप जब एफ आई आर दर्ज करती हैं तो याद रखें कि आप जितना जानती हैं वही जानकारी दे रही हैं, उसको साबित करने की ज़िम्मेदारी आपकी नहीं है.
कग्निजिबल और नॉन- कग्निजिबल अपराध
| कग्निजिबल अपराध | नॉन- कग्निजिबल अपराध |
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1. ऐसा अपराध जो सीधे तौर पर पुलिस के दायित्व के अंतर्गत आता है 2. प्रक्रिया शुरू करने के लिए एफ आई आर का दर्ज होना ज़रुरी है 3. पुलिस बिना वारेंट के भी गिरफ्तार कर सकती है 4. शिकायत कर्ता को क्रिमिनल कोर्ट में न्याय के लिए जाना पड़ता है |
1. इस तरह के केस में पुलिस की कोई भी ज़िम्मेदारी नहीं है. जांच करने के लिए उन्हें मजिस्ट्रेट के आदेश की ज़रूरत होती है. 2. पुलिस को नॉन- कग्निजिबल रिपोर्ट फाइल करने की ज़रूरत होगी, उसके बाद इसे मजिस्ट्रेट को भेजना होगा 3. पुलिस को वारेंट (मजिस्ट्रेट से) जारी करने के ज़रूरत पड़ती है 4.न्याय के लिए शिकायत कर्ता को सिविल कोर्ट में जाना पड़ता है |


